Sunday, March 05, 2017

अद्भुत भारतीय जीवन दर्शन - कर्मयोग

हाल ही में चार्टर्ड एकाउंटेंसी (CA - IPCC) का  परीक्षा परिणाम आया. बीकानेर के गाव का एक बालक पुरे भारत में १४वे स्थान पर आया. पूरी पढ़ाई हिंदी माध्यम के गावके स्कुल से करने के बाद उस बालक ने अथक परिश्रम कर के अंग्रेजी में इंतिहान दिया. कहते हैं वो आज भी अंग्रेजी में संवाद नहीं कर पाता है लेकिन परिश्रम और सिर्फपरिश्रम की बदौलत उसने उन लोगों को पछाड़ दिया जो पूरी पढ़ाई कान्वेंट स्कूलों से कर के आये हुए हैं. उसने साबित कर दिया की भारत के गावों की जमीन में आज भीपरिश्रम और कर्मयोग के वो अंकुर मौजूद हैं जिसके सहारे कोई भी व्यक्ति किसी भी मंजिल को हासिल कर सकता है.
बलराम सिर्फ एक पैर होते हुए भी आपको मुस्कुराता हुआ नजर आता हैउसने भगवान् महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर में कृत्रिम पैर लगवाया और शुरू करदिया कर्मयोगवो रोज १५ किलोमीटर साइकल चला कर नोकरी करने जाता है और वापिस १५ किलोमीटर साइकल चला कर घर पहुँचता है.उसके अदम्य साहस औरपरिश्रम के सभी मुरीद हैभगवन महावीर विकलांग सहायता समिति के डॉक्टर प्रवीण कुमार जैन बताते हैं की वो एक भी दिन अपने कार्यस्थल पर देर से नहीं पहुँचताकृत्रिम पाँव के सहारे वो इतना इत्मीनान से चलता है की जब तक कोई गौर नहीं करे - तब तक पता ही नहीं चलता की उसके सिर्फ एक पैर हैऐसे अनेक दृश्टान्त आपकोभगवान महावीर विकलांग सहायता समिति में मिल जाएंगेहर साल २०००० से ज्यादा लोग अपनी जिंदगी को बदल डालते हैं यहाँ  कर.

प्रश्न है की क्या है जिससे हम अपने जीवन में मुस्कान ला सकेंप्रश्न है की क्या है जिससे हम अपने जीवन को दशा और दिशा बदल सकेंप्रश्न हैं की घुटनतनाव,दुःखअवसाद और हताशा  से निकलने के लिए हम क्या करेंपूरी दुनिया आज असफलता से निपटने के रास्ते ढूंढ  रही   हैहर तरफ एक बंद सड़क हैकोई रास्तानजर नहीं  रहा हैक्या है समाधानहर दूसरे दिन मानसिक रोगियों को संख्या बढ़ रही हैहर मोड़ पर इंसान अपने को तोड़ताकुचलता गुजर रहा हैउम्र की हरदहलीज अपने साथ ज्यादा से ज्यादा नकारात्मकता पैदा कर रही हैक्या करेंकोई अपवाद नहीं हैसमाधान है अद्भुत भारतीय दर्शनश्री कृष्ण ने अर्जुन को जो ज्ञानदिया आज उसकी पूरी दुनिया को जरुरत हैबौद्ध दर्शन ने जब कहा "अप्पा दीपो भव:" तो उसकी आज सबसे ज्यादा  जरूरत हैजब महावीर और गौतम बुद्ध ने कहा कीईश्वर नहीं आपको ही अपनी तकदीर बनानी है और अपने कर्मों से अपना प्रारब्ध और अपना भविष्य सुधारना है तो इस बात की आज सबसे ज्यादा जरुरत है.
श्री कृष्ण ने कर्म योग को ज्ञान योग से भी ज्यादा महत्त्व दियाकर्म योग को अपना कर हर कोई  व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता हैकर्मयोग किसी भी समस्याका समाधान हैजीवन रूपी संग्राम में हर व्यक्ति थका- थका नजर  रहा हैइस संग्राम का परिणाम हमारे ही हाथ में हैंइस संग्राम में सफलता के लिए हर व्यक्ति कोकर्मयोग को समझना हैअफ़सोस यही है की आज हर व्यक्ति प्रोफेशनल तो बन रहा है लेकिन कर्मयोगी नहीं बन रहा है.  भारतीय दर्शन के स्रोत से आज फिर से पूरीदुनिया को कर्मयोग की दिशा दिखाने की जरुरत हैआज किसी भी पढ़ाई या किसी भी प्रशिक्षण से ज्यादा जरुरी है लोगों के साथ संवाद स्थापित कर के उनको जीवन मेंकर्मयोग को कैसे अपनाएँ इस पर चर्चा करने कीआज फिर एक खुले आसमान की जरुरत है जहाँ पर लोग इस मुद्दे पर चिंतन कर सकेंकिताबों का बोझ बढ़ा कर बहुतदेख लियाडिग्रियों के अम्बार ने भी निराश ही कियाक्यों  फिर से उसी राह को अपनाएँ जिसको अपना कर पार्थ ने महाभारत को फतह किया थाजहाँ फिर सेकर्मयोगी का महिमा मंडन शुरू हो जाएगा - वहां फिर से जीवन  की जटिल पहेलियों का समाधान मिल जाएगा.

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