Sunday, January 29, 2017

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चलो बेवतनों को अपनी माटी याद दिलाएं 

(अंतरास्ट्रीय  प्रवासी दिवस विशेष )

संयुक्त राष्ट्र १८ दिसंबर को अंतरास्ट्रीय प्रवासी दिवस के रूप में मनाता है. दुनिया में रोजगार के लिए अपनी जन्म भूमि को छोड़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. आज पूरी दुनिया में २५ करोड़ लोग अपने देश को छोड़ कर किसी और देश में रह रहे हैं. सबसे ज्यादा पांच  करोड़ लोग (जो अलग अलग देशों से अमेरिका आ कर बस गए हैं. ) तो सिर्फ अमेरिका में ही रहते हैं. इन लोगों की मज़बूरी है - आर्थिक मजबूरियों और रोजगार के लिए ये लोग अपने देश को छोड़ कर किसी अन्य देश में जा बसे हैं. दुनिया में हर ३० में से एक व्यक्ति अपने देश को छोड़ कर किसी अन्य देश में रह रहा है. हर सात में से एक व्यक्ति अपने ही देश में किसी अन्य राज्य में रह रहा है. लोगों का यु अपनी जन्म भूमि को छोड़ना आज लगातार बढ़ रहा है तो उसके साथ ही समस्याएं भी बढ़ रही हैं. 

भारत से दुनिया में सबसे ज्यादा लोग गए हैं और इसी कारण भारत में विदेशों से भारतीय मूल के लोगों के द्वारा भेजी जानी वाली आमदानी पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है. ये आमदानी भारत सरकार के लिए एक सहारा है और विदेशी मुद्रा भुगतान संतुलन में मददगार होती है लेकिन एक कडुआ सच ये भी है की कई देशो में भारतीय लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं. अक्सर उन अत्याचारों की खबर प्रकाशित हो जाती है जिसको पढ़ कर के हमारे रोंगटे खड़े हो जाएँ. ये तो तब है जब ज्यादातर ख़बरों को गोपनीय रखा जाता है. गल्फ देशों और अफ्रीका में बड़ी संख्या में भारतीय गए हैं और ज्यादातर लोगों को अमानवीय कष्ट सहने पड़ते हैं. 

सायप्रस, लेबनान, सीरिया, श्रीलंका, सोमालिया आदि कुछ ऐसे देश हैं जहाँ से भारतियों को बच के आने के लिए पुरे देश ने दुवाएं दी. कही युद्ध के कारण, कहीं जातिगत हिंसा/ विरोध के कारण, कहीं व्यापक हिंसा के कारण तो कहीं कंपनियों के द्वारा दुर्व्यवहार  के कारण  भारतियों को अपनी जान बचा के आना पड़ा. केरल, तमिलनाडु, दक्षिणी गुजरात, राजस्थान के झुंझुनूं और सीकर क्षेत्र से  बड़ी संख्या में लोग विदेश गए हैं लेकिन आज उन लोगों को विदेशों में बड़े ही अपमान की जिंदगी जीनी पद रही है (हालांकि ये भी सच है की उनको काफी आमदानी करने का मौका मिला). 

भारत से अमेरिका के लिए सबसे ज्यादा  लोग  गए हैं और आज भी जाना चाहते हैं. लेकिन आज अमेरिकी लोग भारतीय लोगों को हतोत्साहित करना चाहते हैं और आने वाले समय में वीसा संबंधी नियम को और कठोर बनाया जाएगा. 

भारत में विदेशों में बसे भारतीय  लोगों की मदद के लिए कोई सुव्यवस्थित ढांचा होना चाहिए जिसको कभी भी मदद के लिए संपर्क किया जा सके. झांसा दे कर विदेशों में ले जाने वाले "कबूतरबाज" गिरोह बहुत ही खतरनाक है - इन के चंगुल में फंसे लोगों को बचाने  के लिए भी एक मजबूत व्यवस्था होना जरुरी है. भारत को विदेशों से लगातार संपर्क कर के अपने नागरिकों की सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त करने चाहिए. 

इस अवसर पर शरणार्थियों का जिक्र भी प्रासंगिक है. पूरी दुनिया में ये लोग अविश्वसनीय कष्ट झेल रहे हैं. ये लोग बिना घर-बार के सिर्फ उम्मीद के सहारे अपना समय काट रहे हैं. जम्मू कश्मीर में शरणार्थी शिविरों में अटके शरणार्थियों का जिक्र भी जरुरी है. बड़ी संख्या में हिन्दू शरणार्थियों को मजबूर हो कर जम्मू कश्मीर में शरणार्थी शिविरों में समय बिताना पड़ रहा  है और उनको फिलहाल उम्मीद की कोई किरण नहीं नजर आ रही है. 

आज शिक्षण संस्थाओं और राष्ट्र प्रेमी संस्थाओं को लोगों में फिर से देश प्रेम की ललक जगानी है और लोगों में बढ़ रहे विदेश जाने के लगाव को रोकना है (आज महानगरों में तो हर युवा अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जाने की फिराक में है ). विदेशों में बसे भारतियों को भी भारत वापिस लौटाने के लिए प्रेरित करना है ताकि वो अपनी प्रतिभा से मातृभूमि की सेवा कर इसको स्वर्ग बनाये. विदेहों में बसे भारतीय लोग आज अपनी प्रतिभा से अद्भुत नाम और यश काम चुके हैं और उनकी अदम्य कार्य - क्षमता से भारत को भी लाभ मिल सकता है. आज ज्यादातर युवा विदेश पढ़ाई करने  जाते हैं लेकिन फिर उनको भारत की सरकारी कार्यप्रणाली और कमजोर आधारभूत व्यवस्था देख कर भारत से नफरत हो जाती है और वो पराये हो जाते हैं. यहाँ उनको संबल देने, और देश की कमियों को दूर करने के लिए सरकारी तंत्र को दुरस्त करने के लिए आवाज उठाने की जरुरत है ताकि प्रतिभा पलायन रुक सके. 

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