Saturday, October 01, 2016

ECONOMIC EXPLOITATION

आर्थिक शोषण और शोषक नीतियों पर एक नजर 
लोगों की जिंदगी की दशा और दिशा तय करना अब आसान हो गया है. नीति निर्माता वो व्यक्ति हैं जो देशों और सभ्यताओं को एक नयी दिशा दे सकते हैं. ये वो लोग हैं जो अपनी नीतियों से लोगों की जिंदगी को बदल सकते हैं. अगर ये लोग देश की आर्थिक नीतियों को एक नयी दिशा देते हैं तो उससे लोगों को एक नई सोच और नयी रौशनी मिल सकती है. कई गरीब देशों की आर्थिक नीतियों के कारण वहां के लोगों को आज एक नई सुबह मिल रही है. जैसे उरुग्वे में आर्गेनिक कृषि को बढ़ चढ़ कर अपनाया गया है. प्रश्न है की देश के नीति निर्माताओं की प्राथमिकता क्या है? 


आज पूरी दुनिया कुछ लोगों के इशारों पर चल रही है. जैसी नीतियां नीति निर्माता तय करते हैं वैसे ही लोगों की जिंदगी बदल जाती है. प्रश्न है की क्या वो नीति निर्माता जानते हैं की वो लोगों की जिंदगी को किस तरफ धकेल रहे हैं? एक उदहारण देता हूँ. हमारे देश की नीति आयोग के एक बहुत उच्च अधिकारी ने कहा की आने वाले समय में कृषि में ज्यादा सम्भावना नहीं है अतः लोगों को शहरों की तरफ स्थानांतरित कर उनको बेहतर जीवन देने के लिए योजना बनायीं जानी चाहिए. मैं यहाँ पर दो प्रश्न आपको मंथन हेतु प्रस्तुत करूँगा. पहला - किस आधार पर ये मान जाए की आने वाले समय में कृषि में ज्यादा सम्भावना नहीं है? कम से कम मैं तो ये बात मानने के लिए तैयार नहीं हूँ - और मेरी जैसी सोच रखने वाले वो लोग जो जीडीपी को ज्यादा महत्ता नहीं देते बल्कि जीवन के आनंद और उल्लास को ज्यादा महत्त्व देता हैं - वो भी इस बात से सहमत होंगे. प्रश्न है की कृषि को ज्यादा सम्बल और मजबूती देने की जगह पर लोगों को गावों से शहरों में स्थानांतरित करने में जो लोगों को कस्ट होगा और जो यंत्रणाएँ झेलनी पड़ेगी - उसका क्या? क्या आर्थिक नीतियां बनाने वाले इन बातों को सोच रहे हैं? सरकारी नीतियों के कारण जंगल वीरान हो रहे हैं, पेड़ तोड़े जा रहे हैं, गाव उजड़ रहे हैं, घर वीरान हो रहे हैं, प्रतिभा का पलायन हो रहा है पर शायद आप नहीं मानेंगे क्योंकि आप तो ये ही सोच रहे हैं की देश के नीति निर्माता तो बहुत ही सोच समझ कर नीतियां बनते हैं और हम को उनको मान कर देश की चिंता उन पर छोड़ देनी चाहिए 

पूरी दुनिया में आज इस बात पर बल दिया जा रहा है की इंसान को अधिक से अधिक मशीनी रूप में पेश किया जाए. इंसान को एक कोमोडिटी मान लिया गया है. इंसान को एक कोमोडिटी मानते हुए ही सारी योजनाएं बनायीं जाती है. इंसान को जब चाहे स्थानांतरित किया जा सकता है, जब चाहे नयी तकनीक सिखाई जा सकती है और जब चाहे उसको नए रोजगार और नए काम में डाला जा सकता है. क्या ये मान्यताएं उचित हैं? प्रश्न है की आम इंसान को प्रभावित करने वाले निर्णय बहुत सोच विचार कर लिए जाते हैं तो फिर उनमे बार बार बदलाव क्यों? क्यों सत्ता बदलने पर वो निर्णय बदल दिए जाते हैं? क्यों विपक्ष के लोग सत्ता में आते ही उन निर्णयों को लेते हैं जिनके वो स्वयं विरोधी रहे हैं? 

जापान में १८६८ से १९१२ के दौर को मैजी शासन के दौर से गुजरना पड़ा. इस दौर में मेइजी सरकार ने आम लोगों की भलाई के लिए एक नीति के तहत व्यवस्थागत बदलाव किये और पुरे देश का कायाकल्प कर दिया. उनकी एक नीति थी, एक आदर्श था और एक योजना थी. उनकी सफलता के पीछे कई कारण थे - जैसे - एक शाशन, एक नीति, अनुशाशन और जन कल्याण की भावना. ये वो बाते हैं जो किसी भी नीति निर्माता को देश का कल्याणकारी बन सकती है. 

आज भारत के विकास पर दृस्टि डालें तो हम निम्न बातों पर गौर कर सकते हैं: - 

एक नीति के तहत ६० के दशक से फर्टिलिजर व् अन्य केमिकल को कृषि के क्षेत्र में प्रोत्साहित किया गया और उसके लिए सरकार को भारी मात्र में सब्सिडी भी देनी पड़ी. सरकार की इस नीति के परिणाम स्वरुप पुरे देश में कृषकों ने वर्षों की परम्परागत कृषि को त्याग दिया और और केमिकल खेती को अपनालय. जहाँ पर पहले किसान गोबर और अन्य आर्गेनिक कृषि को अपनाते थे - वहां पर अब केमिकल कृषि अपनाने लगे. आज हम सब जानते हैं की भारत की परम्परागत कृषि ही दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कृषि है और पूरी दुनिया में उसको आर्गेनिक कृषि के रूप में अपनाया जा रहा है और अब भारत सरकार भी उसको लागू करने के लिए योजना बना रही है. प्रश्न है की उस नीति के कारण हमें नुक्सान हुआ उसका कौन जिम्मेदार है? प्रश्न है की अब हम वापिस परम्परागत कृषि को अपनाने के लिए क्या करें? अगर सरकार उस समय केमिकल की जगह पर गोबर और गाय पालन पर सब्सिडी दे देती तो आज कितना सुनहरा दिन होता और शायद हम पूरी दुनिया में आर्गेनिक कृषि के लिए जाने जाते. पर ऐसा नहीं हुआ और आज सिर्फ पछतावा और दिक्क्तें हैं 

हर सरकार इसी तरह के निर्णय लेती है जो सिर्फ ५ साल को ध्यान में रख के लिए जाते हैं  - क्यों नहीं हम कुछ ऐसा प्रयास करें की नीति निर्माता एक आइडियोलॉजी के तहत कार्य करें और देश को एक नयी दिशा देने के लिए कृतसंकल्प हों 

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