Saturday, October 01, 2016

AN APPEAL TO THE GOVERNMENT

मेरी सरकार से छोटी सी आशा 

हम सब सुनते आये हैं की अच्छे दिन आएंगे - और हम सब चाहते हैं की अच्छे दिन आएं. इसी लिए हम सब को मिल कर प्रयास करने की जरूरत भी है. सरकार  कोई  जादूगर  नहीं  है अतः इससे बहुत ज्यादा उम्मीद करना गलत है. सरकार के पास समस्याओं का पुलिंदा ले जाने से भी कुछ नहीं होने वाला - क्योंकि सरकार की अपनी प्राथमिकताएँ हैं. आप सरकार को पत्र लिखेंगे - शायद जवाब भी नहीं मिले. सत्तर और अस्सी के दशक में मैंने मेरे पिताजी को सरकार को पत्र लिखते हुए देखा है और उन सभी पत्रों का जवाब भी आता था. उस समय तकनीक सीमित होने के बावजूद भी सरकार लोगों को जवाब देना अपना फर्ज मानती थी. उस समय सरकार के पास न आज जैसे तकनीक थी न आज जितने अधिकारी और कर्मचारी थे लेकिन आम लोगों की मदद करने और आम लोगों को जवाब देने का जज्बा था. आज स्थिति बदल गई है. अत्याधुनिक तकनीक है, अनेक अधिकारी हैं  - पर वो नहीं है जो आप चाहते हैं. सरकारी महकमों में काम करने का तरीका बद से बदतर हो रहा है. अगर सरकारें चाहें तो इ-गवर्नेंस को लागू कर के आम आदमी की दिक्क्तें कम कर सकती हैं. चाह हो तो राह भी निकल आती है. 

सरकार की कार्यप्रणाली में बदलाव ऐसे ही नहीं आ सकता - बुराई तो अपने आप आ जाती है - अच्छाई लाने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं. सरकारी कार्यप्रणाली से आज हम सब लोग कुछ सीमा तक दुखी हैं - लेकिन उसमे बदलाव के लिए क्या उपाय हो? प्रयास तो हम सब को करने ही पड़ेंगे - हम सबके प्रयासों से सुधार होगा. 
इ-गवर्नेंस   की जरुरत 
हाल ही मैं मुझे गिरदावरी और जमाबंदी बनवाने के लिए पटवारी से संपर्क करने की जरुरत पड़ गयी. सरकार ने तो अपनी तरफ से पूरी व्यवस्था कर रखी है (सरकार चाहे तो इस प्रकार के काम को इ-गवर्नेंस के द्वारा इतना सुगम बन सकती है की आम आदमी को पटवारी के पास जाने की जरुरत ही न पड़े - पर पता नहीं सरकार ऐसा क्यों नहीं करती) . पटवारी के फोन नंबर सरकारी दफ्तर में टंगे हुए हैं. पर क्या पटवारी मिलता है - फोन पर संपर्क करने पर बहुत ही रुख जवाब मिलता है. पटवारी से मिलने के लिए चक्कर लगाओ तो लगाते ही रह जावोगे - इसी दौरान मैंने देखा की छोटे छोटे कामों के लिए कितने किसान पटवारी के आगे पीछे चक्कर लगा रहे हैं और पटवारी है जैसे ईद का चाँद. काफी चक्कर लगाने के बाद भी मेरा काम नहीं हुआ  - लेकिन मैं ये देख के ज्यादा दुःखी था की वो किसान जो दूर दराज के गावों से भीषण गर्मी में छोटे छोटे काम के लिए आते हैं और उनका काम फिर भी नहीं होता. उनको देख के मेरे काम न होने का अफ़सोस गायब हो गया. अगर इ-गवर्नेंस पूरी तरह से लागू हो जाता तो इन किसानों को पटवारी के चक्कर लगाने की जरुरत ही नहीं पड़ती - इ-मित्र केंद्र से ही उनके सारे काम हो जाते. लेकिन इस के लिए हम सब को आवाज उठानी पड़ेगी. कुछ सरकारी अधिकारी इ-गवर्नेंस को लागू नहीं होने देना चाहते - आप समझ सकते हैं - ऐसा वो क्यों कर रहे हैं.  
विगत कुछ समय में एक परिवर्तन तो आ रहा है की उच्च अधिकारीयों को विनम्रता से पेश आने की ट्रेनिंग दी जा रही है इस कारण उनके व्यवहार और आचरण में परिवर्तन आ रहा है. लेकिन इस परिवर्तन का प्रभाव नीचे के स्तर पर नजर नहीं आ रहा है. जैसे ही कोई सरकारी विभाग में नियुक्ति पाता उसका नजरिया ही बदल जाता है. आम लोगों के प्रति संवेदन हीन  होना एक प्रकार की सरकारी कार्यप्रणाली का भाग बन गया है. 
जहाँ जहाँ पर इ-गवर्नेंस लागू हो रहा है वहां वहां पर परिवर्तन आ रहा है और लोगों को अपना काम सुगमता से करने का मौका मिल रहा है. ऐसे भी कई अपवाद मिल जाते हैं जहाँ पर बड़े ही विनम्र और मददगार लोग होते हैं जो आम आदमी की भलाई खुल कर करते हैं. 
पब्लिक रॉकिंग की जरुरत 
निजी क्षेत्र की कम्पनियों के लिए क्रेडिट रेटिंग करवाना अनिवार्य है. जब भी वो ऋणपत्र जारी करती हैं तो उनको अपनी क्रेडिट रेटिंग दिखानी पड़ती है. काफी समय से इस बात पर चर्चा चल रही है की सरकारी विभागों की भी कार्यप्रणाली का सर्वे होना चाहिए और उनकी भी पब्लिक /  कस्टमर रेटिंग जारी होनी चाहिए. जो विभाग आम जनता (पब्लिक) के साथ अच्छे से पेश नहीं आ रहे उनकी रैंकिंग ख़राब आ जायेगी. और तब उन विभागों को बंद कर के नए सिरे से विभाग बनने चाहिए या निजी क्षेत्र को काम सौंप देना चाहिए. पब्लिक रेटिंग जारी होने से ही सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली में बदलाव आना शुरू होगा. इस के लिए हम सब नागरिकों को मांग करनी पड़ेगी. 
गारंटी ऑफ़ सर्विस
काफी समय से बात चल रही है की सरकारी सेवाओं में गारंटी शामिल होगी और नियत समय में काम पूरा होगा. लेकिन ये गारंटी जब तक पूरी तरह से लागू नहीं होगी तब तक सुधार नहीं होगा. इस गारंटी के लिए भी हम सब को आवाज उठानी पड़ेगी. 
जरुरी सेवाओं की तरफ हो ध्यान 
सरकारों पर एक दबाव होना चाहिए की जरूरी सरकारी सेवाओं पर वो पूरा ध्यान देवे. नित नए विभाग बनाये जा रहे और और नए लोगों को नियुक्त किया जा रहा है लेकिन जरुरी सेवाओं का अता - पता ही नहीं है. आप किसी भी जरुरी सेवा को देख लेवे - सब जगह ये ही हाल है. कानून, आंतरिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, बदमाशों को पकड़ने का काम, आदि - ये जो सरकारी काम हैं - जो की जरुरी काम है - उनके लिए सरकार के पास कर्मचारी नहीं है. गैर जरुरी कामों के लिए सरकार दुनिया भर की नियुक्तियां कर रही है. कोई भी व्यक्ति ये कह सकता है की प्राथमिकता क्या है. उन प्राथमिकताओं के लिए सरकार क्या कर रही है. विगत मुख्य न्यायाधीश ने तो यहाँ तक कह दिया था की निजी क्षेत्र की तरह कोर्ट भी २४ घंटे और साल भर खुले रहे ताकि लोगों को न्याय मिल सके - लेकिन क्या हुआ? आज भी हालत वो के वो हैं. क्या सरकारों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए नियुक्तियां की? नहीं - नियुक्तियां उन क्षेत्रों में हो रही है जो गैर जरुरी क्षेत्र हैं - जिन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र भी काम कर सकता है. गैर जरुरी क्षेत्रों में (जिनमे निजी क्षेत्र भी बहुत अच्छा काम कर रहा है ) निजीकरण किया जा सकता है लेकिन इन प्राथमिकता के क्षेत्रों (जैसे कानून, आंतरिक सुरक्षा आदि )के लिए तो सरकारों को अपनी प्राथमिकता देनी ही पड़ेगी. 

तकनीक का हो इस्तेमाल 
आज भी बहुत बुरा लगता है जब मैं सरकारी महकमों को पुराने ज़माने की तकनीक को ढोता हुआ देखता हूँ. पुरानी तकनीक के कारण सरकारी विभाग बहुत ही बेहाल नजर आते हैं. पता नहीं क्यों सरकारी अधिकारी नयी तकनीक को लागू करना ही नहीं चाहते. कई विभागों में तो कम्प्यूटर डब्बों में बंद पड़े रहते हैं - वर्सो तक. एक व्यक्ति मुझ से बोल : - "आज भी मैं जब आंबेडकर सर्किल के पास से गुजरता हूँ - तो ये देख के बहुत बुरा लगता है की ५-७ यातायात पुलिस कर्मी एक मोटरसाइकिल सवार के पीछे भागते हैं -क्यों क्योंकि हेलमेट नहीं है - आज के तकनीक के जमाने में क्या जरुरत है ५-७ पुलिस अधिकारियों को आम आदमी के पीछे इस तरह भगाने का? कैमरे से विडिओ रिकॉर्ड कर के मोटरसाइकल सवार के घर पर पेनल्टी का बिल भेज जा सकता है. इन ५-७ अधिकारियों को कानून व्यवस्था सुधारने और गुंडे बदमाशों को पकड़ने के काम लगाया जाए तो देश का ज्यादा कल्याण होगा. " वो व्यक्ति ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है लेकिन उसको भी इतनी समझ है - पता नहीं कब हमारी सरकार इन छोटे छोटे बदलाव के द्वारा देश की आम जनता के कल्याण के लिए कदम उठाना शुरू करेगी? 

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