Saturday, October 01, 2016

WAR FOR PEACE

असली जंग के लिए तैयारी 

प्रेम और युद्ध दुनिया की हकीकत है. किसी ने कहा था की दुनिया में लोग दो तरह के जुनून के लिए जीते हैं - प्रेम के लिए और दुश्मनी के लिए   पुराने जमाने में लोग पत्थरों से लड़ते थे - फिर हथियारों से लड़ने लगे, फिर बाबर आया तो उसने बारूद को युद्ध में इस्तेमाल किया - फिर अमेरिका ने परमाणु बम्ब से जापान को तबाह किया - और फिर नए जमाने की जंग शुरू हो गयी है. आने वाले जमाने में जंग कैसे होगी? असल जंग सभ्यताओं की है. असल जंग विचारधाराओं की है. पूर्व और पश्चिम अलग अलग विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. विचार सिर्फ विचार ही नहीं बल्कि जीवन का आधार हैं. विचारधारों को समझना जरुरी है और उनको आगे बढ़ाना भी जरुरी हैं. दुनिया में सभ्यताएं क्यों जिन्दा हैं - क्योंकि वो मजबूत विचारधाराओं पर आधारित हैं. विचारधाराएं इतनी मजबूत नींव पर हैं की उनको समाप्त नहीं कर सकते हैं. सभ्यताएं खत्म कर सकते हैं लेकिन विचार खत्म नहीं कर सकते हैं. लेकिन आने वाले समय में जंग तो विचारधाराओं को फैलाने की होगी. आने वाले समय में इस जंग का मैदान कोई एक मैदान नहीं होगा - परंतु हर मानव का मस्तिष्क होगा. जंग हर व्यक्ति के दिमाग में होगी. तय करना होगा की क्या करें  - किस विचारधारा की तरफ जाएं. जब इंसान शिक्षा प्राप्त करता है -तो वो एक आजादी भी प्राप्त करता है - आजादी होती है विचारधारा को अपनाने की. शिक्षित व्यक्ति सही गलत का फैसला कर के अपनी विचारधारा को चुनता है. विचारधारा का चयन जन्म या धर्म, या जाती से नहीं बल्कि अपनी समझ, अपनी विश्लेषण क्षमता और अपनी निर्णय क्षमता से होता है. हर अगली पीढ़ी के पास शिक्षा और चिंतन के ज्यादा अवसर हैं. हर अगली पीढ़ी के सामने चुनॉती है की वो अपने को ज्यादा वैचारिक और प्रगतिशील बनाये. आज लोग विचारधारा के आधार पर पूरी दुनिया में अपने मित्र बना रहे हैं. चिंतन, चर्चा, मंथन, और वैचारिक परिपक्वता का नया दौर आने वाला है. लोगों को अपनी जिम्मेदारी का बोध हो रहा है तो पूरी दुनिया में चेतना और चिंतन का एक ऐसा माहौल तैयार हो रहा है जहाँ पर लोग स्वयं आवाज उठा रहे हैं और लोगों की आवाज के आगे कट्टरपंथी ताकतें टूटती जा रही हैं. आने वाले समय में जो जंग हम लोग लड़ेंगे - उसमे दुश्मन का भी हमें पता नहीं लगेगा - हो सकता है हमारा पडोसी भी हमारा दुश्मन हो - क्योंकि विचारधारा की लड़ाई में लड़ाई इंसानों के बीच नहीं - विचारधाराओं के बीच होती है. 

अगर विचारधारा का आधार सही है तो कभी न कभी वो  फिर से पूरी दुनिया पर छा जाएंगी. आज नहीं तो कल भारतीय विचारधारा पूरी दुनिया के लिए आदर्श विचारधारा बन कर उभरेगी. आज नहीं तो कल भारतीय विचारधारा को पूरी दुनिया अपनाएगी. आज नहीं तो कल विचारधाराओं के जंग में पूरी दुनिया भारतीय विचारधाराओं को समझने के लिए प्रयास करेगी.  आईये समझे क्या है जो हमें पूरी दुनिया से अलग करता है - और क्यों हम पूरी दुनिया को नेतृत्व दे सकते हैं. पूरी दुनिया आज वैचारिक युद्ध के धरातल पर है और जंग की तैयारी है. पूरी दुनिया में आज इंसान के पास अधिक से अधिक समय है. तकनीक ने इंसान को काम के बोझ से मुक्त कर दिया है और आज इंसान में देवता और हैवान एक साथ अपने अपने रंग दिखा रहे हैं. दुनिया के इतिहास में इतने बड़े स्तर पर हैवानियत और देवत्व कभी नहीं रहा होगा. हर वर्ष अधिक से अधिक संख्या में दुष्कर्म हो रहे हैं तो अधिक से अधिक संख्या में सुकृत्य भी हो रहे हैं. अखबार पढ़ कर कभी भी ये मत सोच लेना की दुनिया में सिर्फ हैवानियत ही बढ़ रही हैं. दैवत्व भी उसी तरह से बढ़ रहा हैं. चुनॉती आज आपके सामने हैं - आप भी उठ खड़े होईये और अपने सुप्त दैवत्व को जगाईये. 

सरकारों को झकझोरने की जरुरत हैं. शिक्षण संस्थाओं को चेतना और अध्यात्म से जोड़ने की जरुरत है. कॉरपोरेट जगत को हमारे इस यज्ञ में जोड़ने की जरुरत है. आज आम इंसान तकनीक की मदद से अपनी आवाज को पूरी दुनिया तक पंहुचा सकता है तो फिर विचारधारों को कौन रोक सकता है. हैवानियत फैलाने वाले भी हम जैसे ही लोग हैं और सभ्यताओं की इस जंग में उनको पहचानना मुश्किल है. प्रश्न है की हम अपनी आवाज को किस तरह से रखने को तैयार हैं. मूल्य विहीन और उद्देश्य विहीन पश्चिमी शिक्षा का नतीजा आप देख रहे हैं - आप के पास इंजिनीर, डॉक्टर, साइंटिस्ट - सब हैं - लेकिन उनके पास इंसानियत नहीं है - आज ये बात सब मान रहे हैं - और सब ये भी स्वीकार कर रहे हैं की भारत की शिक्षा प्रणाली ही सर्वश्रेष्ठ थी. एक उदाहरण देता हूँ. श्रेष्ठतम पढ़ाई करने वाले लोग बड़ी बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के प्रबंधक हैं. वो अपनी आमदानी बढ़ाने के लिए अश्लील विडियो, अश्लील मैसेज के पैकेज बनवाते हैं और आम ग्राहकों को भेजते हैं. उन अश्लील विडियो के दुष्परिणाम से हमारी नयी पीढ़ी बर्बाद हो रही है. आप बताईये ऐसी पढाई करने वाले लोग समाज के क्या काम आये  ?  आप बताएं ऐसी सरकार क्या काम आयी जो इस प्रकार के विडियो पर रोक नहीं लगा सकती है? समाज को खत्म करने के जहर तैयार करने वाले ये लोग आप हम सब के बीच बड़े सम्मान के साथ बैठते हैं - लेकिन याद रहे - आज उनकी और अपनी जंग हैं. वो समाज को नजरअंदाज कर के अपनी आमदानी बढ़ाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं  - लेकिन भारतीय संस्कृति ऐसा करने नहीं देगी. 

परिवर्तन लाना आसान नहीं ख़ास कर तब जब जंग एक ऐसी विचारधारा के साथ हो जो दुनिया में भौतिकता को फैलाना चाहती है और हम दुनिया में अध्यात्म फैलाना चाहते हैं. परिवर्तन लाना और भी मुश्किल है क्योंकि नयी पीढ़ी को ये समझने में बहुत समय लगेगा की भौतिकता और अध्यात्म में क्या जरुरी है और क्यों. दुनिया में बुरी मुद्रा अछि मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है - ये ही हाल विचारधारा के जंग में होता है - बुरे विचार - अच्छे विचारों को जंग में बाहर कर देते हैं - लेकिन ये भी याद रखिये की हर इंसान जीवन और मृत्यु के अटल सच को समझता है और जिस दिन वो श्मशान जाता है उस दिन ये सत्य उसको फिर से स्पस्ट हो जाता है - और उस सत्य बोध के सहारे वो मजबूर हो कर जीवन के अटल सत्य के साथ जुड़ जाता है. भौतिकता के इस माहौल के पास भारतीय विचारधारा से जंग में हार के सिवाय कुछ भी विकल्प नहीं है. भारतीय विचारधारा में जीवन में आनंद, वैभव, और उल्लास के सारे विकल्प हैं लेकिन इन सर्वोपरि सत्य तो अध्यात्म है. धर्म भी सिर्फ आध्यात्म की तरफ ले जाने का एक मार्ग है. 

आइए शुरू करें जंग की शुरुआत. सबसे पहले सरकार, प्रशाशन और अन्य सुप्त अधिकारियों से अनुरोध करें की बाल - यौन वीडियो को तुरंत रोके - और फिर आवाज उठायें की अश्लील विडियो की वेबसाइट को पुरे भारत में रोका  जाए - उन सभी वेबसाइट और मीडिया को रोका  जाए जो समाज में अश्लीलता, व्याभिचार, और गलत आचरण को बचाव दे रहे हैं. ध्यान रहे की ये जंग है - और हमारे दुश्मन हमारी सभ्यता और विचारधारा को खत्म करने के लिए युवाओं को गलत रास्ते की तरफ धकेलने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. साइबर क्राइम , पोर्न  वेब,  व्याभिचार और गलत व्यवहार को नहीं रोकने और बढ़ावा देने का ही परिणाम है की पुरे भारत में आज बलात्कार, यौन शोषण, व् इस प्रकार के अन्य अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. हर स्कुल और हर कॉलेज को हमारे इस जंग में साथी बनाना पड़ेगा - और बाल मन पर पड़ रहे गलत संस्कारों को रोक के उनको अद्भुत भारतीय संस्कारों से जोड़ना पड़ेगा. 

इस जंग में हम सब साथ हैं - क्योंकि ये जंग इंसानियत के लिए है. आज कई संस्थाएं आगे आ रही हैं और पोर्न वेबसाइट के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं. आज कई लोग हैं जो अपनी लेख और अपने ब्लॉग से पूरी दुनिया को एक नयी रौशनी दिखाने का प्रयास कर रहे हैं. सबसे अच्छी शुरुआत तो ये होगी की आज के हमारे शानदार लोगों के बारे में लिखा जाए ताकि लोगों का विशास बना रहे और अच्छाई से विशास कभी न टूटे. गुंजन जैन ने हाल ही मैं २४ महिलाओं के संघर्ष की कहानी लिखी - और उनकी पुस्तक को काफी लोकप्रियता मिल रही है. अहमदाबाद में प्रोफेसर अनिल गुप्ता ने पुरे भारत के आविष्कारों को संबल दिया और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के माध्यम से आविष्कारों को पेटेंट करवाने का रास्ता आसान किया. इला भट्ट ने सेवा नामक संस्था से लाखों महिलाओं को शशक्त किया. इला पाठक ने आवाज नामक संस्था से लाखों महिलाओं को उनके अधिकार दिलवाये. नारायण सेवा संस्थान और भगवान् महावीर विकलांग सेवा समिति ने विकलांगों के लिए अध्भुत कार्य किया.  पाकिसान के ईदी इलाही ने लाखों लोगों को विपत्ती में मदद की. बांग्लादेश के मोहम्मद यूनुस ने ग्रामीण बैंक से लाखों लोगों को संबल दिया. नेल्सन मंडेला ने पांच दशक जेल में बिता कर के भी अपना संघर्ष नहीं छोड़ा और पूरी दुनिया से नस्लीय भेदभाव समाप्त करवा के ही दम लिया. ये सभी लोग हमारे ही साथी हैं / थे - तो आप सोच सकते हैं की इस जंग मैं हम अकेले नहीं हैं. भारतीय विचारधारा वैविध्य, नवाचार और अन्वेषण को समर्थन करती है लेकिन जीवन का आखिरी लक्ष्य भी मोक्ष के रूप में तय करती है यानी जीवन एक विराट उद्देश्य के लिए जीना है न की किसी क्षुद्र  भौतिक उद्देश्य के लिए. आईये इस युद्ध से पहले महान संत दधीचि को याद करें जिन्होंने विचारधारा की लड़ाई के लिए अपनी कुर्बानी दे दी थी. 

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