save girl child
सभ्य समाज को सदैव कोई न कोई पथ प्रदर्शक चाहिए. हर समाज में कोई न कोई
कमी होती है और उस कमी को दूर करने के लिए समाज के लोगों को ही जम के
प्रयास करने पड़ते हैं. आज के समाज की सबसे बड़ी समस्या "कन्या भ्रूण
हत्या" है. ये इंसान को हैवान बना देती है तो समाज को अकल्पनीय
दुष्परिणामों के गर्त में धकेल देती है. ये समस्या पढ़े लिखे विक्सित समाज
की समस्या है.
इन्टरनेट का ज़माना २५ सितंबर रविवार को राष्ट्रीय बेटी दिवस के रूप में
बना रहा है. ये दिवस बेटियों को उनके प्यार और मोहब्बत के लिए समर्पित
है. बेटियां खुशियां, प्यार, मोहब्बत, रौनक, उल्लास, और कर्तव्य निष्ठां
का प्रतिरूप होती है. इस दिवस को उल्लास से मनाना आज प्रासंगिक हो गया
है. आज बेटियों के महत्त्व को समाज को समझाना जरुरी हो गया है. बेटियों
के बिना तो समाज का अस्तित्व ही नहीं बचेगा.
बेटियां शुभकामना हैं - प्यार उनको दीजिये
तोहफा है जिंदगी का - शुक्र खुद का कीजिये
मुस्कुराती तितलियाँ हैं - खिलखिलाने दीजिये
संस्कृति रक्षक हैं ये - इन पर भरोसा कीजिये
खुशनसीब हैं आप - जी भर के बेटी पालिये
हर गम से हर जुल्म से बेटी को बचाइए
मिट जाएंगी क्रूरता से - भ्रूण हत्या रोकिये
ये सहारा हैं सभी का - पर बिन सहारे हैं ये आज
वक्त की आवाज भी है - फर्ज भी है आपका
किलकारियों के लिए - किलकारियों को बचाइए
बेटियां हर घर को रौनक से भर देती है. लेकिन आज कन्या भ्रूण हत्या के
बढ़ते दुष्परिणाम समाज देख रहा है. हरियाणा और पंजाब जैसे विकसित राज्यों
में लिंगानुपात लगातार गिर रहा है. पढ़े लिखे और विक्सित लोगों में इतनी
संकीर्ण सोच क्यों है - क्यों वहां पर लड़कियों की संख्या इतनी काम हो रही
है. हरियाणा में तो शादी के लिए लड़कियां मिलना ही मुश्किल सा हो गया है.
लड़कियों की घटती संख्या के कारण समाज में कई दुष्परिणाम देखने को मिल रहे
हैं. परिवारों की रौनक गायब हो रही है. समाज में लड़कियों के घटते अनुपात
के कारण लड़कों की शादियां नहीं हो पा रही है और इसके कारण समाज में
दुराचार बढ़ रहा है. इससे एक दुष्चक्र शुरू हो रहा है. लड़कियों के साथ
बढ़ती छेड़छाड़ की घटनाओं के कारण मातापिता लड़कियों को लेकर ज्यादा चिंतित
रहते हैं. पारिवारिक कुप्रथाओं -रीतिरिवाजों और दहेज़ जैसी कुरीतियों के
कारण आज भी पुत्र की चाह होती है. इन सब कुचक्रों को तोड़ कर फिर से लोगों
को बेटियों को बेटों से ज्यादा प्यार करने के लिए प्रेरित करना है.
गत रविवार को महफिले अदब और पर्यटन लेखक संघ के संयुक्त कार्यक्रम में
महारानी सुदर्शन कॉलेज और जैन कन्या महावियालय की छात्राओं ने स्वरचित
कविताएं सुनाई . लगभग सभी छात्राओं (कवयित्रियों) ने बेटी बचाओं का
सन्देश दिया. ऐसे प्रयास अधिक से अधिक संख्या में होने चाहिए और उन
जल्लादों के खिलाफ कढोर कार्यवाही होनी चाहिए जो कन्या भ्रूण हत्या के
लिए उकसाते हैं या उसमे सहयोग करते हैं.
हमारे प्रदेश में हमारी सुसंस्कृत परम्पराओं के कारण लड़कियों के साथ छेड़
छड़ की घटनाएं बहुत कम होती है और आम तोर पर लड़कियों के लिए सब जगह
सुरक्षा का माहौल है. लेकिन महानगरों की हालात चिंतनीय है. रोज कोई न कोई
दुष्कर्म होते रहते हैं. इन मामलों में त्वरित न्याय और कढोर कानून जरुरी
है. हर शिक्षण संस्था को छात्राओं के लिए जुडो-कराटे या इस प्रकार के
प्रशिक्षण आयोजित करवाने चाहिए.
शराब, नाईट क्लब, अश्लील फ़िल्में व् पोर्न वेबसाइट समाज को बर्बाद कर
रही हैं. सरकार को इस दिशा में कठोर कदम उठाने पड़ेंगे. समाज के विकास के
लिए इन सब पर रोक लगाने की जरूरत है. सरकार को अपनी आमदानी के बारे में
नहीं बल्कि समाज और संस्कृति के बारे में सोचना चाहिए. ऐसे मीडिया पर भी
प्रतिबन्ध लगाना चाहिए जो समाज में अश्लीलता को बढ़ावा दे रहे हैं. ऐसे
ऐसे अखबार और पत्र - पत्रिकाएं आते हैं जो लड़कियों की नग्न तस्वीरें
छापते हैं - जबकि उन तस्वीरों का कोई ओचित्य नहीं होता है - पता नहीं वो
समाज को कैसी दिशा देना चाहते हैं? हम नागरिकों को ऐसे मीडिया का
बहिष्कार करना चाहिए और दूसरे लोगों को भी बहिष्कार के लिए प्रेरित करना
चाहिए. अगली बार जब आप ऐसे टीवी चैनल या अखबार या पत्र-पत्रिका को देखें
तो सब लोगों से उनके बॉयकॉट के लिए आह्वान करें. जब कोई देखेगा ही नहीं
तो मजबूर हो के इन निकृष्ट लोगों को सुधरना पड़ेगा. समाज को बचाने के लिए
आम आदमी को कदम बढ़ाने पड़ेंगे और सरकारों पर दबाव बनाना पड़ेगा.

0 Comments:
Post a Comment
<< Home