Sunday, March 05, 2017

तकनीक का आतंक और परिवर्तन की तैयारी

- प्रोफ़ेसर त्रिलोक कुमार जैन, नॉलेज क्रिएटर्स, पारख निवास, सिवाकामू वेटरनरी हॉस्पिटल रोड बीकानेर 9414430763 jain.tk@gmail.com
आज तकनीक हर किसी को आतंकित कर रही है. ऑनलाइन इकॉनमी का प्रारूप देश में हर व्यक्ति को प्रभावित कर रहा है. इस परिवर्तन की राह में परेशान होना स्वाभाविक होता है और परिवर्तन से परेशानी आना भी स्वाभाविक है. इस परिवर्तन का विरोध करने से क्या होगा? सही फैसला तो ये ही होगा की परिवर्तन की दिशा और उद्देश्यों को समझ कर उस के लिए अपने आप को तैयार करें और इस परिवर्तन की आंधी में आगे बढ़ते हुए खुद को भी लाभान्वित करें और देश को भी मदद करें.
भारत की अर्थव्यवस्था परिवार की अर्थव्यवस्था है और परिवार की व्यवस्थाओं को समझ के ही हम किसी आर्थिक निर्णय की समालोचना कर सकते हैं. भारत में २५ करोड़ परिवार रहते हैं. नोटबंदी के कारण हर परिवार औसतन ५०००० रूपये भी अपने बैंक खाते में डालता है तो परिणाम स्वरूप १२ लाख करोड़ से ज्यादा का धन बैंको के द्वारा अर्थव्यवस्था में आता है. ये राशि क्रेडिट क्रिएशन के द्वारा बहुत अधिक मात्रा में तरलता यानी उधार के द्वारा कृत्रिम संपत्ति पैदा कर देगी. अगर एक व्यापारी को १० रूपये भी दिए जाते हैं तो वो पचास साल में अपनी व्यावसायिक दक्षता से उसके . लाख गुना कर सकता है (लेकिन ये राशि सरकारी तंत्र में अटक गे तो ये संभव नहीं होगा)  (दो रूपये सैकड़े से आप गणना कर के देख सकते हैं). बैंकों में आया इतना पैसा व्यापार और उद्योगों को उधार के रूप में जाएगा - तो आप स्वयं कल्पना कर सकते हैं की कितनी राशि का धनार्जन हो सकेगा. यदि एक अनुमान भी लगाते हैं तो पचास साल बाद इस एक निर्णय के परिणामस्वरूप देश में बढ़ी राशि ३६ लाख-लाख करोड़ रूपये हो जायेगी जिसके द्वारा आम व्यक्ति की आमदानी बढ़ जायेगी.
कोई भी बड़ा बदलाव नए उद्योगों के लिए रास्ते खोल देता है तो इस निर्णय से भी नए उद्यमियों को मौका मिल जाएगा. नयी तकनीक को अपनाने, फैलाने और उसके व्यावसायिक लाभ उठाने में उद्यमी दक्ष होता है तो आप निश्चित मानिये की युवा उद्यमी आज नए ज़माने के लिए तैयारी कर रहे हैं. सरकारी उपक्रमों को भी बदलाव लाने में मदद करने के लिए कहा गया है. जयपुर रेल स्टेशन पर सब कुछ कॅश लेस्स इकॉनमी से जुड़ गया है. चाय बेचने वाला भी कहता है की वो ऑनलाइन भुगतान लेने के लिए तैयार है. पेटीएम जैसी कंपनियों के वारे न्यारे हो रहे हैं  - ये तो सिर्फ शुरुआत है. उद्यमियों को आगे आना चाहिए और परिवर्तन की राह में सहयोगी बन कर के देश का भी भला करना चाहिए और खुद भी सफल उद्यमी बनना चाहिए. डिजिटल इकॉनमी में साइबर क्राइम भी बहुत बढ़ेंगे - अतः साइबर सिक्योरिटी, इन्टरनेट, ऑनलाइन वेबसाइट आदि का प्रचलन बढ़ेगा. इस दिशा में लोगों को प्रशिक्षण और संबल प्रदाद करने की जरुरत है. इस अवसर पर में निम्न सुझाव दूंगा  -
. तकनीक को अपना कर उसको फैलाने के लिए पहल करने के लिए मिल कर प्रयास करने की जरुरत है अन्यथा हम पिछड़ जाएंगे और फिर सिर्फ अफ़सोस रह जाएगा
. तकनीक हमारी गुलाम है लेकिन हम को उसको समझ कर उसको अपने उद्यम में अपनाना हैं.
. किसी निर्णय का दूरगामी परिणाम आकलन कर के उसके लिए अपनी व् अपने परिवार और अपने मित्रों की तयारी में मदद करनी है.
. अगर हम मिल कर के प्रयास करेंगे तो सरकार भी हमारा मदद करेगी.
डिजिटल इकॉनमी में अधिक से अधिक सौदे ऑनलाइन होंगे - जिस पर अगर सरकार % टैक्स भी लगाएगी तो सरकार की आमदानी सालाना ५०००० करोड़ से ज्यादा होगी और फिर शायद सरकार इनकम टैक्स और इस प्रकार के अन्य कर कम करने या हटाने के बारे में भी सोच सकती है. डिजिटल इकोनॉमी में कर छुपाने के लिए कोई सम्भावना नहीं है अतः सरकार भी खुश और जनता भी खुश.
परिवर्तन कोई भी हो मुश्किल होता है. सोच, आदत, और व्यवहार को बदलना बहुत मुश्किल है. सभी लोग इस परिवर्तन के लिए तैयारी कर रहे हैं सबसे बड़ी चुनॉती तो युवा वर्ग को उठानी है - उनको हर अनपढ़, बुजुर्ग, और सशंकित व्यक्ति को प्रशिक्षित करना है और सहारा देना है. सरकार की परिवर्तन की रफ़्तार बहुत ज्यादा तेज है और देश, खास कर ग्रामीण परिवेश के लोग इसके लिए तैयार नहीं है. इस चुनॉती की घडी में युवाओं को संकट मोचन की भूमिका निभानी है.

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