Sunday, January 29, 2017

ATAL BIHARI VAJPAYEE

सुशाशन  का स्वप्नदृष्टा  - अटल अनूठा 

(२५ दिसंबर को राष्ट्रीय सुशासन दिवस पर विशेष) 
भारत के  लोकप्रिय नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिवस २५ दिसंबर है और इसलिए इस दिन को राष्ट्रीय  सुशाशन दिवस के रूप में मनाया जाता है. श्री अटल जी  सुशाशन की मिसाल है. जब कश्मीर में भारतियों के प्रवेश के लिए कार्ड सिस्टम था तो उसका विरोध सिर्फ श्याम प्रसाद मुखर्जी और अटल जी ने किया और कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने में अहम् भूमिका निभाई. नीति, सिद्धान्तों और सुशाशन को जीवन में उतारने वाले  श्री अटल जी ने हमेशा आम लोगों की भलाई के लिए सोचा और भारत की आवाज को अंतरास्ट्रीय मंच पर मजबूत पहचान दी. उन्होंने पहली बार संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया. उन्होंने भारत में स्वाभिमान और सकारात्मक सोच की मुहीम शुरू की और विदेशों के आगे झोले फैलाने की भारत की पुरानी नीति का परित्याग किया. उनके मार्गदर्शन में भारत ने  एक आक्रामक विदेश नीति और प्रबल राष्ट्रवाद की शुरुआत देखि. भारत को स्वर्णिम उंचाईयों तक पहुंचाने वाले इस स्वप्नदृस्ता का जीवन आदर्शों और मानदंडों की मिसाल है. वे सच मायने में एक युगपुरुष हैं जिन्होंने राजनीति में आदर्श, आध्यात्मिकता और अद्भुत भारतीय जीवन मूल्यों को स्थापित करने का प्रयास किया. 

श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वो मानदंड स्थापित कर दिए जिनको अपनाना आज के नेताओं के लिए मुश्किल परंतु आदर्श है. आजादी के पहले के हमारे सभी नेता लेखक, विचारक, चिंतक और जन-कल्याणकारी सोच रखने वाले थे. आजादी के बाद तो उस तरह के नेताओं का अकाल ही शुरू हो गया है. धन-दौलत से राजनीति में अपनी सत्ता हधियाने वाले लोगों को सुधारने  के लिए आज के समय में श्री अटल बिहारी का आदर्शवाद एक उम्मीद की किरण हैं. एक चिंतक, विचारक और कवी के रूप में उन्होंने फिर से एक सम्वेदनशील व्यक्तित्व के नेता के रूप में उभरने की मिसाल प्रस्तुत की - शायद उनके बताये मार्ग पर चल  कर  भविष्य में फिर से इस प्रकार के दार्शनिक और जान-हितेषी जान-नेता आगे आ सकें. 

श्री वाजपेयी सच्चे अर्थों में भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि हैं. उन्हीं की एक कविता के कुछ अंश इस प्रकार हैं : - 
बचपन, यौवन और बुढ़ापा, 
कुछ दशकों में ख़त्म कहानी। 
फिर-फिर जीना, फिर-फिर मरना, 
यह मजबूरी या मनमानी?  

उन्होंने जीवन को मोक्ष के  बेहतरीन लक्षय  को हासिल करने के लिए एक साधन के रूप में देखा है जो की भारतीय विचारधारा का प्रतिबिम्ब है. श्री वाजपेयी ने अपने समकालीन सभी देशप्रेमियों को अपना सहयोग और सहारा दिया. उन्होंने श्री श्याम प्रसाद मुखर्जी जैसे लोगों को भारत में ऊर्जा और देशप्रेम का जज्बा जगाने में अद्भुत योगदान दिया जिसकी आज फिर से जरुरत है. उन्होंने श्री विनोबा भावे के अद्भुत प्रयासों को सराहा. श्री विनोबा पर उनकी एक कविता कुछ इस प्रकार है : -  
जन की लगाय बाजी गाय की बचाई जान,
धन्य तू विनोबा ! तेरी कीरति अमर है।

आज के युवाओं को देश की विभिन्न समस्याओं के लिए श्री अटल बिहारी का सन्देश अद्वितीय है. वे लिखते हैं : - 
आग्नेय परीक्षा की 
इस घड़ी में— 
आइए, अर्जुन की तरह 
उद्घोष करें : 
‘‘न दैन्यं न पलायनम्।’’

उन्होंने भारत के प्रशाशनिक तंत्र को एक जिम्मेदार, देशप्रेमी, संवेदनशील और आदर्श प्रशाशन शुरू करने के लिए प्रेरित किया. भ्रस्टाचार, प्रशाशनिक शिथिलता और देश के प्रति निष्ठा में कमी आज नासूर बन गए हैं और हमारे समाज को खोखला कर रहे हैं. श्री वाजपेयी एक  आदर्श राजनीतिज्ञ हैं जिनका अनुकरण  कर के आज भी  सुशाशन की उम्मीद जगाई जा सकती है. श्री वाजपेयी ने ये साबित कर दिया की एक सिद्धान्त वादी और ईमानदार व्यक्ति भी चारों  तरफ फैले भ्रस्टाचार, अनाचरण और तुच्छ राजनीति के कंटीले रास्तों को पर कर के देश के प्रधान मंत्री पद पर आसीन हो सकता है. 

उनकी जीवनी और उनके संस्मरण सभी अधिकारियों और राजनेताओं  के लिए प्रातः समरणीय हैं और सभी प्रशासनिक प्रशिक्षुओं को उनकी कर्तव्यनिष्ठा  की घुट्टी पिलाई जानी चाहिए. आज के अन्धकार  में श्री वाजपेयी का व्यक्तित्व एक आदर्श और एक उम्मीद की किरण हैं. श्री वाजपेयी का कवी मन आम आदमी की परेशानियों को तुरंत महसूस कर लेता था और वे द्रवित हो जाते थे. लेकिन वे साथ में इतने कठोर भी हैं   की कभी भी जीवन मूल्यों से समझौता नहीं करते . उनको १३ दिन की सरकार भी चलानी पड़ी और १३ महीने की सरकार भी चलानी पड़ी - पर न तो उन्होंने जोड़तोड़ की राजनीति की, न ही तुस्टिकरण की नीति अपनायी. जब वे विपक्ष में रहे तब भी देश की इज्जत और विदेशों में भारत और भारत वासियों की साख को बढ़ाने के लिए प्रयास करते रहे. आईये दुआ करें की देश के प्रशाशक उनसे प्रेरणा लेवें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें. उनके अधूरे सपने तभी पुरे होंगे जब नीति निर्माता उनकी तरह निर्भीक और स्वाभिमानी हो कर शुद्ध भारतीय हितों को तबज्जु देना शुरू करेंगे.

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